पंडरिया मे धान घोटाला उजागर — समिति अध्यक्ष के घर से 700 कट्टी धान बरामद क्षेत्र मे मचा हड़कंप

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🌾 पंडरिया में धान घोटाला उजागर — समिति अध्यक्ष के घर से 700 कट्टी धान बरामद, क्षेत्र में मचा हड़कंप

पंडरिया (कबीरधाम)।
कबीरधाम जिले के पंडरिया विधानसभा क्षेत्र में उस समय सनसनी फैल गई जब आदिम जाति सेवा सहकारी समिति कामठी के अध्यक्ष कृष्णा देवांगन के घर से लगभग 700 कट्टी धान की बोरियाँ बरामद की गईं। बताया जा रहा है कि यह धान समिति से किसानों के नाम पर खरीदा गया था, परंतु उसका भंडारण और मात्रा दोनों ही संदिग्ध पाए गए हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, समिति अध्यक्ष कृष्णा देवांगन भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता हैं और लंबे समय से संगठन में पदाधिकारियों के साथ उनके घनिष्ठ संबंध रहे हैं। इतनी बड़ी मात्रा में धान मिलने के बाद यह चर्चा तेज है कि मामला किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।


❗ प्रशासन और सहकारिता विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि समिति स्तर पर धान खरीदी में अनियमितता लंबे समय से जारी थी, जिसकी शिकायतें पहले भी की गई थीं।
इसके बावजूद प्रशासन और सहकारिता विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। अब अध्यक्ष के घर से धान मिलने के बाद पूरे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।


🚜 किसानों के हक पर डाका, जनता में आक्रोश

कृष्णा देवांगन के घर से मिले इस जखीरे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि किसानों के नाम पर खरीदे गए धान का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुँचा भी या नहीं।
किसानों का आरोप है कि समिति पदाधिकारियों ने धान की कालाबाजारी कर निजी लाभ उठाया, जिससे गरीब किसानों को उनके मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल पाया।


🗳️ राजनीतिक सरगर्मी तेज, विपक्ष ने साधा निशाना

मामले के सामने आते ही पंडरिया की राजनीति में हलचल मच गई है।
विपक्षी दलों ने इसे भाजपा शासन की नाकामी और सहकारिता तंत्र के दुरुपयोग का उदाहरण बताते हुए तीखे प्रहार किए हैं।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि “भाजपा के संरक्षण में समितियों को भ्रष्टाचार का अड्डा बनाया जा रहा है।”


🔍 जांच की मांग और कार्रवाई की प्रतीक्षा

ग्रामीणों और किसानों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।
वहीं, प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

इस घटना ने न केवल पंडरिया क्षेत्र बल्कि पूरे कबीरधाम जिले में शासन, प्रशासन और राजनीतिक तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।


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