तिल्दा-नेवरा। तिल्दा-नेवरा जनपद पंचायत से लगी ग्राम पंचायत बहेसर स्थित शौर्य प्लांट में मजदूरों के शोषण का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लांट प्रबंधन द्वारा मजदूरों को कलेक्टर दर से भी कम मजदूरी दी जा रही है। इस संबंध में पूर्व अध्यक्ष तिल्दा ग्रामीण एवं भजायूमो अध्यक्ष बंशी यादव ने रायपुर के सहायक श्रम आयुक्त को औपचारिक आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई है।
न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान का आरोप
आवेदन में बताया गया है कि शौर्य प्लांट में मजदूरों को शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी के अनुरूप भुगतान नहीं किया जा रहा। साथ ही प्लांट परिसर में बाल श्रमिक निषेध बोर्ड एवं कलेक्टर दर सूची का बोर्ड भी प्रदर्शित नहीं किया गया है, जो श्रम कानूनों का उल्लंघन माना जा रहा है।
ओवरटाइम, पीएफ और ईएसआई नहीं मिलने की शिकायत
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि मजदूरों से लंबे कार्य घंटे कराए जा रहे हैं, लेकिन इसके बदले ओवरटाइम भुगतान, पीएफ एवं ईएसआई जैसी सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। इससे मजदूर परिवारों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
पूर्व विवादों का भी जिक्र
बंशी यादव ने आवेदन में यह भी बताया कि शौर्य प्लांट को लेकर पहले भी विवाद सामने आए थे। उन्होंने पूर्व में प्लांट द्वारा शासकीय जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर तहसीलदार को आवेदन दिया था। अब मजदूरी शोषण के आरोपों से ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया है।
जांच नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
बंशी यादव ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की तत्काल जांच नहीं की गई तो ग्रामीण और मजदूर बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
श्रम विभाग कर सकता है कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार श्रम आयुक्त कार्यालय ने आवेदन को संज्ञान में लिया है। संभावित रूप से औचक निरीक्षण और जांच के बाद दोषी पाए जाने पर बैक वेजेस, भारी जुर्माना, और लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई हो सकती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में आम समस्या
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में स्पंज आयरन प्लांट रोजगार का बड़ा स्रोत हैं, लेकिन मजदूरों के शोषण की शिकायतें भी लगातार सामने आती रही हैं। स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने भी इस मामले में समर्थन देने की बात कही है।

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