06.55 करोड़ का धान घोटाला: सिस्टम फेल या संगठित लूट?

क्राइम

PNBCG NEWS तिल्दा नेवरा पवन बघेल

कोनपारा उपकेंद्र में वर्षों पुरानी गड़बड़ी का पर्दाफाश, एक गिरफ्तार – बाकी फरार

छत्तीसगढ़ । जशपुर/तुमला । विशेष रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था एक बार फिर कठघरे में है। थाना तुमला क्षेत्रांतर्गत धान खरीदी उपकेंद्र कोनपारा (तुमला) में खरीफ वर्ष 2024–25 के दौरान 06 करोड़ 55 लाख 26 हजार 979 रुपये की भारी अनियमितता सामने आई है। हैरानी की बात यह है कि यह घोटाला किसी एक कर्मचारी का नहीं, बल्कि पूरा तंत्र मिलकर की गई हेराफेरी की ओर इशारा करता है।

छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित (अपेक्स बैंक) जशपुर के नोडल अधिकारी की रिपोर्ट पर पुलिस ने बीएनएस की धारा 318(4), 320, 336, 338 व 61 के तहत अपराध दर्ज किया है। मामले में खरीदी केंद्र के प्राधिकृत अधिकारी सहित कुल 6 लोगों को आरोपी बनाया गया, लेकिन अब तक सिर्फ एक फड़ प्रभारी की गिरफ्तारी हो सकी है, शेष आरोपी फरार हैं।

आंकड़े जो सिस्टम की पोल खोलते हैं

रिकॉर्ड के मुताबिक खरीफ वर्ष 2024–25 में उपकेंद्र कोनपारा में

1,61,250 क्विंटल धान की खरीदी दर्शाई गई, जबकि मिलों व संग्रहण केंद्रों को मात्र 1,40,663.12 क्विंटल धान परिदान किया गया।

यानी 20,586.88 क्विंटल धान “कागजों में खरीदा, ज़मीन पर गायब” पाया गया।

संयुक्त जांच दल द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन में भी मौके पर धान उपलब्ध नहीं मिला।

इस कमी से

धान की कीमत (₹3100/क्विंटल के हिसाब से): ₹6,38,19,328 बारदाना (4,898 नग): ₹17,07,651 कुल नुकसान: ₹6,55,26,979

यह सीधा-सीधा शासन को आर्थिक चोट है।

आरोपी कौन-कौन?

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपियों में शामिल हैं—

भुनेश्वर यादव – प्राधिकृत अधिकारी जयप्रकाश साहू – समिति प्रबंधक शिशुपाल यादव – फड़ प्रभारी (गिरफ्तार) जितेंद्र साय – कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश अवस्थी – सहायक फड़ प्रभारी चंद्र कुमार यादव – उप सहायक फड़ प्रभारी इन सभी पर आपसी मिलीभगत से हेराफेरी का आरोप है।

एक गिरफ्तारी, कई सवाल

पुलिस ने फड़ प्रभारी शिशुपाल यादव (39 वर्ष) को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।

लेकिन सवाल यह है कि—

क्या 06.55 करोड़ का घोटाला अकेला फड़ प्रभारी कर सकता है? कंप्यूटर रिकॉर्ड, परिदान, बारदाना और भुगतान की पूरी चेन में निगरानी कहां थी? प्राधिकृत अधिकारी और समिति प्रबंधक की जवाबदेही तय क्यों नहीं हुई?

एक गिरफ्तारी से यह मामला “बलि का बकरा” बनाकर खत्म करने की आशंका भी पैदा करता है।

अपेक्स बैंक और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल

घोटाला खरीफ वर्ष 2024–25 का है, लेकिन एफआईआर 02 जनवरी 2026 को दर्ज होती है।

यानी सवाल उठता है—

इतनी बड़ी गड़बड़ी समय रहते क्यों नहीं पकड़ी गई? नियमित ऑडिट और मॉनिटरिंग केवल कागजों तक सीमित थी क्या?

पुलिस का दावा

एसएसपी जशपुर शशि मोहन सिंह के अनुसार

“अपेक्स बैंक के नोडल अधिकारी की रिपोर्ट पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। एक आरोपी गिरफ्तार किया गया है, शेष की तलाश जारी है।”
लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि मुख्य पदों पर बैठे आरोपी अब भी फरार हैं।

निष्कर्ष: किसान बनाम सिस्टम

धान खरीदी व्यवस्था किसानों के लिए बनाई गई थी, लेकिन कोनपारा मामला बताता है कि यह सिस्टम कुछ लोगों के लिए ‘कमाई का केंद्र’ बन चुका है।

जब तक—

ऊपर से नीचे तक जवाबदेही तय नहीं होगी, सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जगह पूरे नेटवर्क पर हाथ नहीं पड़ेगा, तब तक ऐसे करोड़ों के धान घोटाले बार-बार सामने आते रहेंगे और नुकसान हर बार किसान और राज्य की जनता का ही होगा।

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