तिल्दा-नेवरा: देवरी की चरागाह भूमि 59 साल की लीज पर देने के प्रस्ताव के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध तेज

औद्योगिक

तिल्दा-नेवरा (रायपुर)।
ग्राम पंचायत देवरी, तहसील तिल्दा-नेवरा, जिला रायपुर की सार्वजनिक चरागाह भूमि (खसरा नंबर 443/1-2) को अग्रसेन स्टील प्राइवेट लिमिटेड को 59 वर्षों की लीज पर देने के प्रस्ताव के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि बिना ग्राम पंचायत की अनुमति और बिना किसी वैध एनओसी (NOC) के इस भूमि को उद्योग के लिए आबंटित करने की प्रक्रिया की जानकारी सामने आई है, जिसे ग्रामवासी पूरी तरह अवैधानिक मान रहे हैं।

ग्राम सभा में सर्वसम्मति से विरोध दर्ज

ग्रामीणों के अनुसार 30 जनवरी 2026 को ग्राम देवरी में विधिवत ग्राम सभा आयोजित हुई, जिसमें करीब 393 ग्रामीण, सरपंच एवं पंचगण उपस्थित रहे। ग्राम सभा में अग्रसेन स्टील प्राइवेट लिमिटेड के प्रस्तावित प्लांट के खिलाफ सर्वसम्मति से विरोध दर्ज किया गया।
ग्राम सभा रजिस्टर में लिखित प्रस्ताव पारित कर यह स्पष्ट किया गया कि—
ग्राम पंचायत द्वारा न तो पहले कभी NOC जारी किया गया है और न भविष्य में किया जाएगा।
उक्त भूमि ग्राम की सार्वजनिक चरागाह भूमि है, जो पशुपालकों और ग्रामीणों की आजीविका से सीधे जुड़ी है।
भूमि उपयोग परिवर्तन से पर्यावरण, सामाजिक व्यवस्था और आर्थिक संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

27 फरवरी की जनसुनवाई पर भी ग्रामीणों की आपत्ति

ग्रामीणों ने बताया कि जनपद पंचायत कार्यालय से लिखित सूचना प्राप्त हुई है कि परियोजना को लेकर 27 फरवरी 2026 को ग्राम घुलघुल में जनसुनवाई प्रस्तावित है। साथ ही यह संभावना भी जताई जा रही है कि जनसुनवाई ग्राम देवरी क्षेत्र में भी कराई जा सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम सभा के स्पष्ट विरोध के बावजूद यदि जनसुनवाई कराई जाती है, तो गांव में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है, जिसकी जिम्मेदारी शासन एवं प्रशासन की होगी।

SDM, तहसीलदार और जनपद CEO को सौंपा ज्ञापन

इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों ने अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) तिल्दा-नेवरा, तहसीलदार तिल्दा और मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) जनपद पंचायत को लिखित ज्ञापन सौंपते हुए जनसुनवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
ग्रामीणों ने बताया कि जल्द ही पर्यावरण विभाग और कलेक्टर, जिला रायपुर को भी ज्ञापन सौंपकर प्रक्रिया पर जवाब और कार्रवाई की मांग की जाएगी।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

ग्रामीणों की मांग है कि—
✅ सार्वजनिक चरागाह भूमि को उद्योग को देने की प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जाए।
✅ 27 फरवरी 2026 की प्रस्तावित जनसुनवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए।
✅ ग्राम सभा के 30 जनवरी 2026 के प्रस्ताव को मान्य किया जाए।
✅ पूरे मामले की कानूनी एवं प्रशासनिक जांच कराई जाए।

शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखने की चेतावनी

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि वे चारागाह भूमि, पर्यावरण और ग्राम अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *