तिल्दा नेवरा शहर में सड़क दुर्घटनाएं अब आम बात हो चुकी हैं। आए दिन हो रहे हादसों से आम जनता में भारी आक्रोश है। वर्षों से शहर के बाहर बायपास रोड (पासिंग रोड) की मांग की जा रही है। इसकी घोषणा भी की गई, लेकिन आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया।
खास बात यह है कि खरोरा–तिल्दा रोड पर डिवाइडर निर्माण के लिए करोड़ों रुपये की मंजूरी भी मिली थी। सड़क किनारे स्थित दुकानदारों को नोटिस जारी कर छज्जे हटाने के निर्देश दिए गए थे। कई व्यापारियों ने प्रशासन के निर्देश पर अपने छज्जे हटा भी दिए, लेकिन उसके बावजूद डिवाइडर का निर्माण आज तक नहीं हुआ।
जानकारी के अनुसार डिवाइडर निर्माण कार्य तुलसी चौक से अंबेडकर चौक तक और अंबेडकर चौक से गुरु घासीदास चौक तक किया जाना था, परंतु अब तक जमीन पर कोई काम दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि स्वीकृत राशि आखिर गई कहां?

तिल्दा-खरोरा मार्ग मुख्य मार्ग के रूप में चिन्हित है। इसी तरह तिल्दा-सिमगा मार्ग भी मुख्यमंत्री मार्ग है। तिल्दा से हाथबंद और तिल्दा से संडी-पलारी को जोड़ने वाले मार्ग भी इसी शहर से होकर गुजरते हैं। यानी तिल्दा नगरपालिका चारों दिशाओं को जोड़ने वाला मुख्य जंक्शन है।
इसके बावजूद शहर के बीचों-बीच ओवरलोड भारी वाहन बेधड़क दौड़ रहे हैं। ट्रैफिक नियंत्रण और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आते। डिवाइडर नहीं होने से आमने-सामने की टक्कर की आशंका बनी रहती है, जिससे लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते डिवाइडर और बायपास रोड का निर्माण हो जाता, तो कई जानें बचाई जा सकती थीं। अब बड़ा सवाल यह है कि स्वीकृत कार्य अधूरा क्यों है? जिम्मेदारी किसकी तय होगी? और आखिर कब तक तिल्दा नेवरा के लोग हादसों का शिकार होते रहेंगे?

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