PNBCG NEWS तिल्दा नेवरा रायपुर एडिटर चीफ पवन बघेल
तिल्दा नेवरा | विशेष संवाददाता
शहरी क्षेत्र के किसानों के लिए इस बार धान बेचने की राह आसान नहीं दिख रही है। एग्रीस्टेक पोर्टल (agristech.gov.in) में पंजीयन प्रक्रिया बाधित होने से किसान बेहद परेशान हैं। पोर्टल खुल नहीं रहा है, और पंजीयन के लिए किसान इधर-उधर भटक रहे हैं।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यदि पंजीयन नहीं हुआ, तो क्या वे इस बार अपनी उपज सरकार को बेच पाएँगे या नहीं?
❗ क्या बिना पंजीयन के किसान धान नहीं बेच सकते?
राज्य सरकार द्वारा स्पष्ट किया गया है कि पंजीयन अनिवार्य है। बिना पंजीयन के समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी नहीं की जा सकती। ऐसे में पंजीयन न होने की स्थिति में धान बिक्री का पूरा अधिकार किसान खो सकता है।
किसकी गलती?
- पोर्टल पर तकनीकी गड़बड़ियों के कारण किसानों को पंजीयन में दिक्कत आ रही है।
- कई शहरी क्षेत्रों में लोकसेवा केंद्रों और सहायता केंद्रों पर पर्याप्त संसाधन या स्टाफ नहीं है।
- कृषि विभाग की ओर से भी कई स्थानों पर पर्याप्त सूचना और सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई है।
“हम रोज़ जनपद कार्यालय और सेवा केंद्र के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन पोर्टल खुल ही नहीं रहा। अब तो चिंता हो रही है कि धान बिकेगा या नहीं,” — एक किसान ने दुख जताया।
क्या समाधान है?
- कृषि विभाग को चाहिए कि वह पंजीयन की अंतिम तिथि बढ़ाए और पोर्टल की तकनीकी समस्याओं को तुरंत दूर करे।
- वार्ड स्तर पर कैंप लगाकर पंजीयन कराया जाए, जिससे किसानों को राहत मिले।
- यदि पोर्टल काम नहीं कर रहा, तो ऑफलाइन पंजीयन की सुविधा अस्थायी रूप से शुरू की जाए।
किसान संगठनों की मांग:
किसान संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने शासन से आग्रह किया है कि जब तक पोर्टल की स्थिति सामान्य न हो, तब तक धान खरीदी से वंचित किसानों को जिम्मेदार न ठहराया जाए।
निष्कर्ष:
पंजीयन न होना किसानों की नहीं, व्यवस्था की विफलता है। यदि सरकार वास्तव में किसानों की हितैषी है, तो उसे तुरंत हस्तक्षेप कर इस समस्या का समाधान निकालना चाहिए, अन्यथा यह मुद्दा आगामी समय में एक बड़ा आंदोलन बन सकता है।
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