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विजयादशमी और गांधी जयंती का अद्भुत संगम : 2 अक्टूबर 2025
छत्तीसगढ़
आज का दिन भारतीय इतिहास और संस्कृति के लिए विशेष महत्व रखता है। 2 अक्टूबर 2025 को एक साथ दो महान पर्व मनाए जा रहे हैं – विजयादशमी और गांधी जयंती। यह तिथि केवल कैलेंडर पर दर्ज एक दिन नहीं, बल्कि सत्य की दो परिभाषाओं का अद्वितीय उत्सव है।
श्रीराम का धर्मयुद्ध – अधर्म पर विजय
विजयादशमी के दिन भगवान श्रीराम ने असत्य, अन्याय और अधर्म के प्रतीक रावण का वध कर धर्म और मर्यादा की स्थापना की। यह पर्व इस बात का प्रतीक है कि बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः धर्म और सत्य की ही विजय होती है।
गांधीजी का सत्याग्रह – अहिंसा की शक्ति

इसी दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्मदिवस भी है। गांधीजी ने सत्य, अहिंसा और आत्मबल के मार्ग से ब्रिटिश साम्राज्य को झुकने पर मजबूर किया और भारत को स्वतंत्रता दिलाई। उनका संदेश था कि हिंसा से नहीं, बल्कि सत्य और करुणा से भी बड़ी लड़ाइयाँ जीती जा सकती हैं।
दो युग, एक संदेश
- श्रीराम ने धनुष-बाण उठाकर अन्याय का अंत किया।
- गांधीजी ने सत्याग्रह और अहिंसा का शस्त्र चुना।
- दोनों ने अपने-अपने युग में सिद्ध किया कि सत्य की विजय अवश्य होती है।
प्रेरणा का पर्व
आज का दिन हमें यह सिखाता है कि—
जब अन्याय अपनी सीमा लांघे, तो राम बनना पड़ता है।
और जब सत्य की मशाल जलानी हो, तो गांधी बनना पड़ता है।
विजय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!
आज हम एक साथ श्रीराम की मर्यादा और गांधीजी की महिमा को नमन करते हैं।
यह दिन हमें प्रेरणा देता है कि हम अपने जीवन में भी धर्म, सत्य, संयम और सेवा को अपनाएँ।
जय श्रीराम | वंदे मातरम् | सत्य मेव जयते

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