PNBCG NEWS तिल्दा नेवरा PAVAN BAGHEL
तिल्दा-नेवरा क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति का प्रतीक छेरछेरा पुन्नी का पावन पर्व शहर एवं आसपास के ग्रामीण अंचलों में हर्षोल्लास, आपसी भाईचारे और सौहार्द के वातावरण में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पूरा क्षेत्र छत्तीसगढ़ी लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर नजर आया।
सुबह से ही गांव–गांव और मोहल्लों में बच्चों, युवाओं तथा बुजुर्गों की टोलियां पारंपरिक उल्लास के साथ घर-घर जाकर
“छेरछेरा माई, कोठी के धान हेरहेरा”
का गुंजायमान नारा लगाते हुए छेरछेरा मांगती दिखाई दीं। इस लोकगीत के साथ धान, चावल एवं अन्य अन्न दान देने की परंपरा को लोगों ने पूरे श्रद्धाभाव से निभाया।

छेरछेरा पुन्नी का यह पर्व न केवल अन्नदान की भावना को दर्शाता है, बल्कि समाज में समानता, सहयोग और परस्पर प्रेम का संदेश भी देता है। घरों के बड़े-बुजुर्ग बच्चों को आशीर्वाद देते हुए प्रसन्नता के साथ छेरछेरा प्रदान कर रहे थे। बच्चों के चेहरों पर छेरछेरा मांगने की उमंग और उत्सुकता देखते ही बन रही थी, वहीं ग्रामीणों में भी इस परंपरा को जीवंत बनाए रखने का गर्व साफ झलक रहा था।

शहर के साथ-साथ आसपास के गांवों में भी उत्सव का विशेष माहौल देखने को मिला। पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीतों की मधुर धुनें और आपसी मेल-मिलाप ने पूरे क्षेत्र को छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग में रंग दिया। कई स्थानों पर सामाजिक संगठनों एवं ग्रामवासियों द्वारा सामूहिक रूप से छेरछेरा मनाया गया, जिससे सामाजिक एकता और मजबूत हुई।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि छेरछेरा पुन्नी जैसे पर्व नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं। यह पर्व हमें अन्न के महत्व, दानशीलता और सामूहिक जीवन मूल्यों की याद दिलाता है।
कुल मिलाकर, तिल्दा-नेवरा क्षेत्र में मनाया गया छेरछेरा पुन्नी का पर्व छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को एक बार फिर जीवंत करते हुए सामाजिक समरसता और खुशियों का संदेश देकर संपन्न हुआ
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Editor in Chief
PNBCGNews.in
